उठो देव, बैठो देव – देवउठनी एकादशी गीत
उठो देव, बैठो देव, पाटकली चटकाओ देव।
आषाढ़ में सोए देव, कार्तिक में जागे देव।।
कोरा कलशा मीठा पानी, उठो देव पियो पानी।
हाथ-पैर फटकारी देव, आंगुलिया चटकाओ देव।।
कुवारी के ब्याह कराओ देव, ब्याह के गौने कराओ।
तुम पर फूल चढ़ाए देव, घी का दीया जलाए देव।।
आओ देव, पधारो देव, तुमको हम मनाएँ देव।
चूल्हा पीछे पाँच पछीटे, सासू जी बलदाऊ जी धारे रे बेटा।।
ओने-कोने झांझ मंजीरा, सहोदर किशन जी तुम्हारे वीरा।
ओने-कोने रखे अनार, ये है किशन जी तुम्हारे व्यार।।
ओने-कोने लटकी चाबी, सहोदरा ये है तुम्हारी भाभी।
जितनी खूंटी टांगो सूट, उतने इस घर जन्मे पूत।।
जितनी इस घर सीक-सलाई, उतनी इस घर बहुएं आईं।
जितनी इस घर ईंट-रोड़े, उतने इस घर हाथी-घोड़े।।
गन्ने का भोग लगाओ देव, सिंघाड़े का भोग लगाओ देव।
बेर का भोग लगाओ देव, गाजर का भोग लगाओ देव।।
उठो देव, उठो देव, बैठो देव।।
देवउठनी एकादशी गीत का भावार्थ
गीत में बार-बार कहा जाता है – “उठो देव, बैठो देव”। इसका अर्थ है कि चार महीने की योगनिद्रा के बाद अब भगवान विष्णु जागें और अपने भक्तों का कल्याण करें।
गीत में कई सुंदर बातें छिपी हैं:
- “आषाढ़ में सोए देव – कार्तिक में जागे देव” – इसका मतलब है कि भगवान आषाढ़ महीने में सोते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी पर जागते हैं।
- “कोरा कलशा मीठा पानी – उठो देव पियो पानी” – इसका भाव है कि शुद्ध जल और पूजा सामग्री से देव का स्वागत किया जाए।
- “कुवारी के ब्याह कराओ देव – ब्याह के गौने कराओ” – यह पंक्ति जीवन में शुभ कार्यों के आशीर्वाद की प्रार्थना है।
- गीत में घर-परिवार की समृद्धि, बहुओं का आगमन, बेटों का जन्म, हाथी-घोड़े जैसे वैभव और फल-फूल से भरी झोली की कामना की जाती है।
- अंत में “गन्ने, सिंघाड़े, बेर और गाजर का भोग लगाओ देव” कहकर भगवान को प्रसाद अर्पित किया जाता है।
क्यों गाया जाता है यह गीत?
देवउठनी एकादशी पर यह गीत गाने का मुख्य उद्देश्य है भगवान विष्णु को जगाना और उन्हें पूजा के लिए आमंत्रित करना। यह केवल भक्ति का भाव नहीं बल्कि लोक परंपरा से जुड़ी हुई आस्था है।
गांवों में महिलाएँ दालान या आँगन में दीपक जलाकर, कलश रखकर और मिठाई-फल चढ़ाकर इस गीत को गाती हैं। गीत के बोल भगवान को घर-आँगन की समृद्धि का न्योता देते हैं।
निष्कर्ष
देवउठनी एकादशी का गीत “उठो देव बैठो देव” सिर्फ़ एक लोकगीत नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और भक्ति का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि पूजा केवल मंत्रोच्चार से नहीं, बल्कि दिल की सच्ची भावना से भी होती है।
आप भी इस बार देवउठनी एकादशी पर यह गीत गाकर भगवान विष्णु को जगाइए और उनसे अपने परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना कीजिए।


